धार्मिक यात्रा हिमाचल की
इस बार जाना तो तय था जाना कहां है वह भी तय था , किन्तु एक बात बिल्कुल सत्य है अगर आप अकेले जाना चाहते है तो आप अपनी मर्जी के मालिक है जैसा चाहे वैसा तय करें , अगर कोई साथ जाता है तो आपकी स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाती है , आपको न चाहते हुए भी वह सब करना होता है जो आप नही चाहते , खैर यात्रा हुए तो एक माह के ऊपर हुआ बस लिखने का सहयोग नही बन रहा था और लग रहा था कि कही और निकल चलें । मेरी बिटिया प्रीत वो 10 साल बाद हुई ,में इससे पहले काफी जगह घूमा हु जहां देव स्थान होते वहां बोल दिया था कि जब सन्तान होगी तो दर्शन के लिए आऊंगा बच्चे को माथा टिकवना है । सो बन गया रूट । अपन ठहरे घुमक्कड़ आदमी मानसी भी कुछ जगह मेरे साथ गई है सो वो भी मेरे तौर तरीके अच्छे से समझती है जानती है और वो भी कम में व्यवस्था बनाना जानती है पर हर व्यक्ति वैसा नही कर पाता तब थोड़ी दिक्कत आ जाती है , हमारे मित्र कम साले साहब विनीष दुबे जी और उनकी पत्नी भी तैयार थे बहुत पहले से उन्हें भी जाना था बस डेट तय नहींकर पा रहे थे और हम जिस समय जाना चाहते थे वो नजदीक आ रहा था हम चाह रहे थे 15 फरवरी पर 19 फरवरी को नर्मदा जयंती...