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धार्मिक यात्रा हिमाचल की

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इस बार जाना तो तय था जाना कहां है वह भी तय था , किन्तु एक बात बिल्कुल सत्य है अगर आप अकेले जाना चाहते है तो आप अपनी मर्जी के मालिक है जैसा चाहे वैसा तय करें , अगर कोई साथ जाता है तो आपकी स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाती है , आपको न चाहते हुए भी वह सब करना होता है जो आप नही चाहते , खैर यात्रा हुए तो एक माह के ऊपर हुआ बस लिखने का सहयोग नही बन रहा था और लग रहा था कि कही और निकल चलें । मेरी बिटिया प्रीत वो 10 साल बाद हुई ,में इससे पहले काफी जगह घूमा हु जहां देव स्थान होते वहां बोल दिया था कि जब सन्तान होगी तो दर्शन के लिए आऊंगा बच्चे को माथा टिकवना है । सो बन गया रूट ।  अपन ठहरे घुमक्कड़ आदमी मानसी भी कुछ जगह मेरे साथ गई है सो वो भी मेरे तौर तरीके अच्छे से समझती है जानती है और वो भी कम में व्यवस्था बनाना जानती है पर हर व्यक्ति वैसा नही कर पाता तब थोड़ी दिक्कत आ जाती है , हमारे मित्र कम साले साहब विनीष दुबे जी और उनकी पत्नी भी तैयार थे बहुत पहले से उन्हें भी जाना था बस डेट तय नहींकर पा रहे थे और हम जिस समय जाना चाहते थे वो नजदीक आ रहा था  हम चाह रहे थे 15 फरवरी पर 19 फरवरी को नर्मदा जयंती...

पचमढ़ी ( मध्य्प्रदेश) यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी

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पचमढ़ी हिल स्टेशन की यात्रा और अन्य जानकारी   पचमढ़ी मध्य भारत में मध्य प्रदेश राज्य के होशंगाबाद जिले में स्तिथ, एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। श्री पाच पांडव गुफा पंचमढी, जटाशंकर, सतपुड़ा राष्ट्रीय अभयारण्य यहां के मुख्य आकर्षण है यह ब्रिटिश राज के बाद एक छावनी (पचमढ़ी छावनी) का स्थान रहा है। यहां मध्य प्रदेश और सतपुड़ा रेंज का सबसे ऊंचा बिंदु, धुपगढ़ (1,352 मीटर) स्थित है जो कि पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व का एक हिस्सा है। इस लेख में आप पचमढ़ी हिल स्टेशन की यात्रा, इतिहास, पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल, पचमढ़ी जाने का सही समय और अन्य जानकारी प्राप्त करेंगे। पचमढ़ी कहां स्तिथ है – Location Of Pachmarhi Hill Station In Hindi पचमढ़ी सतपुड़ा रेंज में 1067 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पचमढ़ी हिल स्टेशन की यात्रा में घूमने के लिए कई जगह हैं जैसे कि ऐतिहासिक स्मारक, झरने, प्राकृतिक क्षेत्र, गुफा, जंगल, और कई अन्य दर्शनीय स्थल। जहां प्रकृति प्रेमी पंचमढ़ी कि सुन्दरता का अनुभव कर सकते है। पचमढ़ी हिल स्टेशन पर बने घर औपनिवेशिक वास्तुकला (Colonial Architectural) शैली में बने हुए हैं। पचमढ़ी का यह...

सिवनी दर्शन पूरी जानकारी पेंच नेशनल पार्क मध्य्प्रदेश के साथ

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 पेंच नैशनल पार्क का नाम मध्य्प्रदेश के सिवनी एवं छिंदवाड़ा इन दोनों जिलों को बांटने वाली नदी पेंच के नाम पर रखा गया है  यह नैशनल पार्क 292.83 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, कहा जाता है की इसे साल 1977 में इसे एक वन्य अभ्यारण घोषित किया गया था और साल 1983 में इसे एक नैशनल पार्क ( राष्ट्रीय उद्यान ) बना दिया गया। इसके बाद साल 1993 में इसे एक नैशनल पार्क होने के साथ साथ एक टाइगर रिजर्व भी बना दिया गया और उसके बाद इसे देश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व होने का सम्मान प्राप्त हुआ। साल 2002 में इसे प्रियदर्शनी नैशनल पार्क नाम मिला और तभी से इसे इस नाम से ही जाना जाता है, कहा जाता है की इस ख़ूबसूरत क्षेत्र का उल्लेख मुग़ल शासक अकबर ने भी आपकी एक पुस्तक मे किया है, तो कहा जा सकता है की यह इलाक़ा मुग़ल काल के पहले से ही प्राकृतिक रूप से धनी रहा है। इस नैशनल पार्क को “मोगली लैंड” के रूप में भी जाना जाता है  कहा जाता है की “जंगल बुक” जैसी किताब की प्रेरणा इन्ही इलाको से ली गई है। Pench National Park Is Famous For Which Animal  इस इलाके को बाघों के संरक्षण के लिए बह...

एक लंबी यात्रा ,अच्छा अनुभव भाग - 5

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पिछले अंक में बताया था हम अमृतसर में है अभी  ओर इस अंक में आपको यात्रा कराएंगे मनसा देवी माता चंडीगढ़ ओर शाकुम्भरी माता सहारनपुर , इसके बाद दिल्ली आज सुबह  20 जनवरी 2002 सुबह उठकर नित्यकर्म से फारिग हो बेग तैयार किया कमरे से गद्दे कम्बल ले जाकर काउंटर में जमा करने के उपरांत हम  एक बार पुनः लक्ष्मीनारायण मंदिर गए वह भी दूसरा गोल्डन टेम्पल है , आज यहां कोहरा नही है आराम से घूमते हुए करीब 11- 30 पर  रिक्सा कर बस स्टैंड पहुंच गए , चंडीगढ़ यहां से लगभग 250 किलोमीटर है , हम शाम 6 बजे चंडीगढ़ पहुचे ,पहली बार इतना व्यवस्थित शंहर देखा सभी कुछ सलीके से , भाई योजना बनाकर बसाया भी तो गया है न । हम यहां बस स्टैंड से सीधे मनसा देवी मंदिर के लिए बस द्वारा निकल पड़े , . मनसा देवी मंदिर जो कि एक प्रशिद्ध शक्ति पीठ  है मान्यता है कि दक्ष यज्ञ में सती दहन के उपरांत जब  शिव जी माता सती के शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे तब उनके क्रोध को शांत करने के उद्देश से  भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंड-खंड कर दिया। जिसके बाद कई जगहों पर सती के शरीर के अंग गिरे, वहीं शक्त...

एक लंबी यात्रा , अच्छा अनुभव भाग - 4

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अमृतसर दर्शन --- मित्रों पिछले अंक में हम अमृतसर पहुच गए थे ,जानकारी के आभाव में हमे होटल में रुकना पड़ा, तो भाई हमने होटल में फ्रेश होकर अभी ही गोल्डन टेम्पल जाने का विचार किया , एक उत्सुकता थी टेम्पल देखने की सो निकल पड़े रिक्से वाले ने कुछ दूर ही छोड़ दिया वहां से पैदल गए , गुरुद्वारे की भव्यता देखते ही बनती है बहुत बड़ा मैदान जहां एक ओर जूते ओर समान रखने का स्थान है , वहां लोग सेवा कार्य करते है , मेन गेट से अंदर जाते समय पैर धोकर ओर सर में कपड़ा बांधकर ही जाना होता है जो कि वहां की परंपरा है अंदर जाते ही में तो वही का वही खड़ा रह गया , मात्र जिसकी तस्वीर देखी हो वह साक्षात सामने देखने को मिले तो यही स्थिति होगी रात्री में लाइटिंग में सुनहरा रंग और भी अधिक चमकीला हो जाता है , बहुत बड़ा परिसर जिसमे परिक्रमा मार्ग है , बीच मे पवित्र सरोवर , महिलाओं के नहाने के लिए विशेष व्यवस्था बनी हुई है , लाइन ज्यादा नही थी सो दर्शन जल्दी हो गए ,पूरी परिक्रमा कर हम भंडारे की ओर गए यहां प्रतिदिन लाखों आदमी निशुल्क भोजन करते है , वही गुरु रामदास धर्मशाला भी है ,कुछ देर वही घूमने के बाद हम वापस होटल आकर सो ...