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Showing posts from September, 2020

एक लंबी यात्रा , अच्छा अनुभव। भाग - 3

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वैसे इस यात्रा को हम नौ देवी दर्शन यात्रा वर्णन भी कह सकते है पर बहुत से ऐसे स्थानों पर भी यात्रा की गई कि यह शीर्षक उचित नही लगा  चलिए अब हम ले चलते है आपको इस अंक में  चिंतपूर्णी, नैना देवी, आनन्दपुर साहिब ,ओर अमृतसर की यात्रा में , काफी मित्र कुछ जगह यह सोचेंगे कि भाई गलत रूट पकड़कर चलता है , फलां जगह तो इसके पास थी जबरन घूमकर गया , तो यह बात बिल्कुल सही है कि हमने ऐसा ही किया , जब पहली बार जाओ तो मात्र वे यात्री ही सहारा होते है जो उन जगह घूम कर आ चुके होते है , पर हमारे संपर्क में ऐसा कोई नही था , जिसने जैसा बताया वैसा निकल लिए , तो भाई पिछली यात्रा में हम लौट आये थे मणिकर्ण से , अब जाना है भरवाई यानी हमे जाना है चिंतपूर्णी माता तो जालन्धर बस में बैठकर निकल लिए , रास्ते काफी घुमावदार है , कुछ सवारियां रास्ते भर जगह गन्दी करते रही इस कारण नींद नही लगी , सुबह सुबह 03 बजे बस वाले ने हमे भरवाई छोड़ दिया , वहां काला कुत्ता भर था बाकी कोई नही , ड्राइवर ने बताया था एक दो घण्टे बाद टेक्सी बस चलेंगे उसमे मंदिर तक चले जाना , अब हमें ये भी नही पता कि यहां से कितनी दूर है मंदिर , तो एक...

एक लंबी यात्रा ,अच्छा अनुभव पार्ट - 2

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इस अंक में मनाली , मणिकर्ण का यात्रा वर्णन है।  पिछले अंक में मैने आपको बताया था कि निश्चित नही है जाना कहां है जहां मूड हुआ वहीं निकल जाए रहे थे , हो सकता है कि , कुछ रुट बहुत लंबा भी ले लिए हो , ओर कुछ जगह , फिर से घूम कर वही जाना हो जहाँ से आ चुके है , मोबाइल थे नही , जितना लोगो से पता चलता बस उतना ही ज्ञात रहता ,  हां तो मित्रो 13- 1- 2003  हम मनाली तक पहुंच चुके है होटल भी बढ़िया शानदार मिल गई वो भी 90 रुपये में , रात तो बढियां कट गई , सुबह 6 बजे मैनेजर ने फोन किया जरूर था पर  हम उठे नही , लेट हो गए करब 09 बजे नहा धोकर कमरे से बाहर निकले , तो रोहतांग के लिए जिप्सी वाले निकल चुके थे अब ज्यादा पैसे लगेंगे , रात को एक ओर मज़ेदाए घटना हुई उसकी याद करते हुए अब हसीं आ रही है , हुआ यह कि , रात को होटल वाले लड़के ने पूछा था कि सर पार्टनर चाहिए क्या ? हमने मना कर दिया ,उसने कुछ और समझ कर बोला , ओर हमने समझ लिए कुछ और , होता यह है कि रोहतांग पास जाने वाले जिप्सी वाले होटल वालो से सेटिंग कर लेते है , 2 सवारी हम ले आएंगे 2 तुम दे देना , ऐसा दो सवारी पार्टनर होती है , जब हमने स...

एक लंबी यात्रा,अच्छा अनुभव भाग - 1

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इस यात्रा में कुछ तय नही था कि जाना कहां कहां है , हां माता वैष्णो देवी दर्शन करना है पहले यह बस तय है उसके बाद ? वह उसके बाद देखेंगे । खैर में आपको इस अंक में वैष्णो माता  ,ज्वाला जी , कांगड़ा, चामुंडा , बैजनाथ ,होते हुए मनाली पहुँचाऊँगा ।  05 जनवरी 2003 , हां इस बार लेट हो गए थोड़ा,  भाई पैसे का भी तो जुगाड़ करना पड़ता है कि नही , जब हुआ तब निकल पड़े , तो मित्रो 05 तारीख को शाम में ओर मेरा दोस्त , अरे वही जिसके साथ पिछला टूर शिमला गए थे , अपने को एक साथ चाहिए दुनिया घूम लेंगे , अकेले आज तक गए नही , इसलिए अकेले घूमने का अनुभव नही है।तो हम लोग बस से निकल गए नागपुर ,नागपुर पहुचे 10 - 30 पर दीपक के एक परिचित बस स्टैंड में काम करते है हमने अपना सामान उनके पास रखवा दिया , नागपुर में महाराष्ट्र बस स्टैंड स्टेशन से लगा हुआ है , ओर उसके नजदीक ही एमपी बस स्टैंड है , सामान रखकर हम टेकरी वाले गणेश मंदिर गए बहुत ही सुंदर और प्रशिद्ध मंदिर है वहा से दीपक के मामा के घर गए घूम फिर कर वापस स्टेशन आ गए , अभी ट्रेन आने में समय है ,हां एक बन्दा मिल गया था वहीं दीपक राजदान , वो अखनूर का रहने वाल...

कोलकाता, गोवाहाटी, गंगासागर यात्रा वर्णन भाग। - 2

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पिछली यात्रा में आपको बताया था कि, हम गोवाहाटी से शाम 05 बजे ट्रेन  से निकले और तारीख 29 को उतरना था बर्दवान पर नींद लगी होने से बर्दवान निकल गया हम  सीधे उतर गए हावड़ा ,स्टेशन  में एक लफड़ा हो गया की चेकिंग स्टाफ ने हमे रोका हमने उसे पूरी बात बता दी पर वो नही माना , हमने कहा बर्दवान से हावड़ा की टिकिट के पैसे दे सकते है , वो 3 हजार 2 हजार करते रहे ।  आखिर  हम भी एमपी के है कैसे मान ले उनकी बात हमने अपनी ही मनवाई एक रुपया ऊपर का नही किराए के पैसे बस दिए , भाई हमने जानकर किया नही था , खैर वहां से फ्री होकर चाय पीकर सीधा निकले कोलकाता कोलकाता में कही से भी आपको कागदीप के लिए बस टेक्सी मिल जाएगी , हम जैसे ही फेरी के लिए पहुचे पहुचते ही एक फेरी निकल गई , अब रुकना पड़ेगा हमने टिकिट कटा रखी है , करीब एक घण्टे वहां बेकार हुए वही पर नास्ता वगेरा किया धुंध अत्याधिक है , यहां कीचड़ में वहां के लोकल बच्चे पैसे ढूंढते दिख जाएंगे , जैसे तैसे स्टीमर चला बहुत भीड़ है में आज से पहले कभी भी स्टीमर में नही बैठा हूँ , बैठा क्या हु खड़े होने की जगह मिल गई बहुत है , यह वह स्थान है जहां गंग...