एक लंबी यात्रा,अच्छा अनुभव भाग - 1

इस यात्रा में कुछ तय नही था कि जाना कहां कहां है , हां माता वैष्णो देवी दर्शन करना है पहले यह बस तय है उसके बाद ? वह उसके बाद देखेंगे । खैर में आपको इस अंक में वैष्णो माता  ,ज्वाला जी , कांगड़ा, चामुंडा , बैजनाथ ,होते हुए मनाली पहुँचाऊँगा ।  05 जनवरी 2003 , हां इस बार लेट हो गए थोड़ा,  भाई पैसे का भी तो जुगाड़ करना पड़ता है कि नही , जब हुआ तब निकल पड़े , तो मित्रो 05 तारीख को शाम में ओर मेरा दोस्त , अरे वही जिसके साथ पिछला टूर शिमला गए थे , अपने को एक साथ चाहिए दुनिया घूम लेंगे , अकेले आज तक गए नही , इसलिए अकेले घूमने का अनुभव नही है।तो हम लोग बस से निकल गए नागपुर ,नागपुर पहुचे 10 - 30 पर दीपक के एक परिचित बस स्टैंड में काम करते है हमने अपना सामान उनके पास रखवा दिया , नागपुर में महाराष्ट्र बस स्टैंड स्टेशन से लगा हुआ है , ओर उसके नजदीक ही एमपी बस स्टैंड है , सामान रखकर हम टेकरी वाले गणेश मंदिर गए बहुत ही सुंदर और प्रशिद्ध मंदिर है वहा से दीपक के मामा के घर गए घूम फिर कर वापस स्टेशन आ गए , अभी ट्रेन आने में समय है ,हां एक बन्दा मिल गया था वहीं दीपक राजदान , वो अखनूर का रहने वाला है यवतमाल में इंजीनियरिंग कर रहा है , उसके साथ अच्छा वक्त कट गया , इस व्यक्ति की एंट्री हमारी यात्रा में क्यों हुई इसका राज हमे बाद में पता लगा,वही भी आपको बताएंगे बहुत ही रोचक घटना है । खैर ट्रेन तो आ गयी ,फिर वही सीट रोकने की कशमकश फिलहाल जीत हमारी हुई  बर्थ में कब्जा कर ही लिया , दिन निकला ट्रेन की जिंदगी , हमसफ़रो से हसी मजाक गाने सुनने के बाद गेट पर खड़े होकर बाहर के नजारे देखते हुए शाम हो गई 07 बजे आगरा और 12- 30 पर दिल्ली ,यहां ट्रेन काफी समय रुकती है , हमने राजदान को भी बुला लिया साथ मे खाना खाया कुछ देर वही टहलने के बाद सो गए , ट्रेन कोहरे के कारण लेट चल रही है , लुधियाना का टाइम 09 बजे का है 12 बजे पहुची आखिर  शाम 7- 30पर जम्मू पहुची ट्रेन स्टेशन में हमने कॉफी पी ओर फ्रेश होने चले गए वहां नहा धोकर सामान जमा करवा दिया क्लॉक रूम में  ,बाद में पता लगा सारी बसें जा चुकी है , बाकी बस वाले मालवा की  रस्ता देख रहे है , हम तो फंस गए क्लॉक रूम भी बन्द , गर्म कपड़े सब बेग में है , अब यहां एक घटना बताता हूं कि ऐसा क्यों हो रहा है , आपको पहले बताया था कि एक मित्र मिल गया था वो अखनूर वाला दीपक राजदान , जी हां पठानकोट पहुचने पर उसने हमें अपने डब्बे पर ले गया क्योंकि पठानकोट के बाद मात्र जम्मू ही बचता है , जब हम उसके केबिन में बैठे बाते कर रहे थे तब , मेरी नजर एक व्यक्ति के ऊपर पड़ी , डब्बा पूरा खाली था तो मैने उसे सिगरेट दिया  , उस व्यक्ति ने बहुत ही तेजी से सिगरेट खत्म की , मेने उसका चेहरा ओर सिगरेट पीने के तरीके से समझ गया कि भाई परेशान तो बहुत है , बोल नही पा रहा है , तो मैने उससे पूछा कि भाई क्या परेशानी है , पहले तो कुछ नही बता रहा था फिर बाद में खुल के बताया , वह सैनिक था उसकी अभी अभी पोस्टिंग हुई है ट्रेनिंग के लिए मथुरा के पास कहि केम्प था , वह मथुरा का ही रहने वाला था, ट्रेनिंग के आखिरी दिन शाम को अपने दोस्त को यह बोल कर घर निकल गया की में सुबह स्टेशन में मिल जाऊंगा तुम मेरा सामान बस ले आना , सुबह लेट होने के कारण ट्रेन निकल गई तो भाई ने मोटरसाइकल पर दिल्ली छोड़ा यहां भी वे नही मिल पाए ,हो सकता है वे मालवा से आ रहा हो , यह सोच रहा था वह मेने कहा भाई टेंशन मत लो कुछ नही होगा तुम्हारा दोस्त मालवा से आ रहा होगा और सामान भी ,
अब जब हम सामान सारा जमा करने के कारण ठंड में बाहर भटक रहे थे पेपर बिछा कर लेटे थे तब वह सैनिक हमे मिल गया और अपने केम्प में ले गया , वहां हीटर था अच्छा लगा उसने हमें कॉफी पिलाई , ओर बोला कि मेरा समान बस आ जाये उसे जमा करके, में  आपको वैष्णो माता और आसपास घुमा लाऊंगा , सुबह के 3 बज गए मालवा बहुत लेट हो गई , आधे घण्टे बाद ट्रेन आई तो वह सैनिक हमे रोक कर ट्रेन की ओर दौड़ लगाया , हमे टेंशन यह कि अगर हम वहां रुके तो बस पूरी भर जाएंगी , पर हम वही रुके रहे , थोड़ी देर बाद वह सेनिक अपने दोस्त जो मिल गया था उसे गालियां दी रहा था , मेने पूछा तो बताया कि इसने मुझे मथुरा में न पाकर मेरा सामान मेरे घर पहुचा दिया , अब किट न होने पर में नोकरी से निकाल दिया जाऊंगा , वो बहुत परेशान था हम मजबूरी में उसे छोड़ भी नही सके , आखिर मेने उसे एक हल बताया ,की भाई अपने ऑफिसर को सब सच बता दो , अब जो होगा सो होगा , वह डरते हुए मेरी बात मान कर साहब के पास जाकर सब बता दिया , अचानक दौड़कर आया मुझे गले लगा लिया बोला भाई माफ कर दो में नही घुमा सकूंगा , पर तुमने मेरी नोकरी बचा दी साहब को सब सच बताया तो साहब ने तुरंत दूसरी ट्रेन पकड़ कर घर जाने को बोले ओर सामान लेकर तुरन्त वापस आने के लिए कहा कोई सजा नही दी , हमने उन्हें जय माता दी कहा और नीचे गए सारी बसें पैक थी , रात को एक सरदार जी ने बोला था बस में ले चलने को उन्होंने हमें सामने केबिन में बैठाल ही लिया , हम 05 बजे कटरा पहुच गए 06 बजे काउंटर खुला टिकिट कटाकर सीधा चढ़ना शुरू , उस बार अर्ध कुमारी से नया रास्ता बन गया नीचे ही हम वहां से गए यह बहुत अच्छा है  हाथी मत्था की कठिन चढाई नही चढ़ना पड़ा । सुबह 10 बजे भवन पहुच गए वहां नहाया ओर लाइन में लगे, तब पता लगा कि पुरानी गुफा से दर्शन कराए जा रहे है , यह बात हमारे लिए बहुत ही सुखदाई थी , किसी की सहायता और लेट होने के कारण मन विचलित था पर उसका परिणाम कितना अच्छा मिला इसके लिए माता जी का धन्यवाद किये । इस बार प्रशाद भी यही खरीदा सस्ता पड़ता है है नीचे की अपेक्षा , फिर कुछ भोजन किया और भैरो बाबा के दर्शन को निकल पड़े , भैरो बाबा के दर्शन के बाद वापसी कटरा , बसें लगी हुई थी 10- 30 तक वापस स्टेशन पहुच गए , शिव मार्केट गए वापस आकर क्लॉक रूम से सामान उठाया और वही सो गए , सुबह दीपक भाई लेट उठे इस कारण ट्रेन निकल गई , अब उठे वही फ्रेश हुए , चाय नास्ता किया लोवर , ओर एक जरकिन खरीदी , फिर पठानकोट के लिए ट्रेन पकड़ी , ये चक्की बैंक तक जाएगी दोपहर को पठानकोट पहुच गए , 1 बजे वाली ट्रेन निकल गई थी 04 बजे है अब , खाना वही खाया और आराम , ट्रेन आई तो ज्वाला मुखी रोड तक ट्रेन से गए , किस्मत अच्छी की वह लगी बस मिल गई  तो शाम को  07 बजे मंदिर पहुच गए धर्मशाला में कमरा मिल गया 50 रुपये किराया है ।
सुबह उठकर स्नान ध्यान कर मंदिर गए ज्वाला माता जी की कृपा से अच्छे से दर्शन हो गए ,वैसे मेने ज्वाला माता जी के विषय मे पिछली यात्रा के दौरान जानकारी दे दी थी , में ज्वाला जी 3 बार आ चुका पर अभी तक ऊपर गोरख डिब्बी नही गए दर्शन को , इसबार हमने वह स्थान भी देखा
यहां गोरखनाथ सम्प्रदाय के साधुओं का डेरा है । यहां एक खोह जैसी है जहां पर वे पानी मारते है तो ज्वाला तेजी से आगे आती है , जैसे मानो किसी ने आग में पेट्रोल डाल दिया हो ,  वहीं एक पत्थर का कुंड है बिल्कुल ऐसा रखा है जैसे नीचे चूल्हा ऊपर खाना बनाने जे लिए बर्तन , नीचे ज्योत जल रही है ऊपर पानी खोल रहा है , पर हांथ लगाया तो आश्चर्य , पानी बर्फ के मानिंद ठंडा , कहते है कि बाबा बालक नाथ माता के बहुत बड़े भक्त थे माता भी उन्हें अपना पुत्र Mआन प्रेम करती थी स्वयं अपने हाथों से भोजन बनाकर खिलाती थी , एक दिन बालक नाथ बगेर भिक्षा के वापस आये , माता ने कारण पूछा तो बोले माता आज कुछ नही मिला, माता ने कहा पुनः जाओ अब दूसरी दिशा में जाओ , में तैयारी कर रखती हूं, बालक नाथ जो गए तो बापस ही नही लौटे , माता ने कुंड चढ़ाकर पानी रख दिया था , उ होने बालकनाथ के शिष्य नागार्जुन को आवाज दी , तब नागार्जुन पास आने के बजाय वही पर्वत से खड़ा होकर कारण पूछता है , तब माता बालकनाथ का पता करने को कहती है , तब नागार्जुन वही खड़े खड़े , बताते है कि माता जी गुरु जी कहि दिखाई  नही दे रहे है । तब माता ने क्रोध में आकर बोला कि बालकनाथ तुम जहां हो वही रहो ओर नागार्जुन तुम भी उसी पर्वत पर रहो , बाबा बालकनाथ की समाधि शिमला में जाखू पर्वत पर हनुमान जी मंदिर के ठीक सामने है , ओर ज्वाला देवी पर्वत के बगल में जो पर्वत है उसे नागार्जुन पर्वत के नाम से जाना जाता है । माता रानी के हर चमत्कार को प्रणाम करते हुए हम वहां से तारा मंदिर के दर्शन कर के , नीचे हॉल में गए जहां भंडारा चल रहा था , हमने प्रशाद ग्रहण किया और आगे बढ़ गए बस पकड़ी ओर कांगड़ा , माता बज्रेश्वरी के दर्शन करने , यहां भी सामान हमने प्रशाद बेचने वाले के पास रख दिया और दर्शन करने चले गए वापस आकर समान उठाया और सीधे चामुंडा , हमे उस समय ज्यादा रुट पता  नही थे सो जितनी जानकारी होती वैसा निकल जाते , शाम करीब 7-30 पर चामुंडा मंदिर पहुचे , 
पिछली बार ट्रेन से सीधे मरांडा वहां से चामुंडा फिर ज्वाला जी गए थे , खेर यहां कमरा भी मिल गया । यहां अभी सीजन नही है तो कमरे आसानी से मिल जाते है भीड़ भी नही है , भंडारा यहां भी चल रहा था , अंधे को क्या चाहिए दो आंखें । फटाफट फ्रेश होकर भोजन प्रशादी की ओर लपके , बाहर कहि जाओ तो दो चीज में पैसे ज्यादा खर्च होते है , ओर वो है रुकने ओर खाने , जब दोनों चीज फ्री मिल जाय तो फिर समझ लो जन्नत मिल गई । 
किन्तु रात को बहुत विकट समस्या बन गई मुझे गेस की प्रॉब्लम है , रात को गैस बन गई और कोई गोली भी नही थी , दीपक बहुत परेशान हुआ यह वहां काफी देर तक घूमता रहा कोई गोली दवा मिल जाय , फिर मुझे ध्यान आया कि बेग में नमक के पैकेट रखे है , नमक और पानी का घोल पिया तब जाकर थोड़ा आराम लगा और सीख भी , दूसरे दिन सबसे पहला काम ऐसी लॉक का पत्ता लेकर बेग में रखे , 
आज 11- 1, को सुबह उठे नहाना हुआ तब तक आरती हो गई थी माता जी के दर्शन किये , फिर सामान उठाकर  हम धर्मशाला आ गए सामान यहां रखकर  मैक्लॉड गंज चले गए , मैक्लोडगंज की जानकारी पिछली यात्रा में मैने दे दी है , फिर भी हल्का फुल्का की मैक्लोडगंज हिल स्टेशन है यहां तिब्बतियों को भारतीय ने शरण दी हुई है , यहां दलाई लामा मठ है , भगशु नाग मंदिर है झरना है , बहुत सुंदर हिल स्टेशन है , मैक्लोडगंज , से वापस धर्मशाला आये समान उठाया और पालमपुर होते हुए बैजनाथ पहुच गए , बैजनाथ प्राचीन नगर है यहां भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है , यहां पार्वती  रेस्टोरेंट में , झिक झिक कर 60 रुपये में कमरा ले ही लिया , की सुबह जल्दी चले जायेंगे , सुबह जल्दी उठकर हम मंदिर गए
बैजनाथ में बस स्टैंड के समीप बैजनाथ मंदिर है यह मंदिर नागर शैली में बना है। इसे 1204 ईस्वी में अहुका और मन्युका नामक दो स्थानीय व्यापारियों ने बनवाया था। यह वैद्यनाथ (चिकित्सकों के प्रभु) के रूप में भगवान शिव को समर्पित है शिलालेखों के अनुसार वर्तमान बैजनाथ मंदिर के निर्माण से पूर्व इसी स्थान पर भगवान शिव का पुराना मंदिर था। मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग है। बाहरी दीवारों पर अनेकों चित्रों की नक्काशी हुई है मंदिर के मुख्य कक्ष में चट्टान पर नक्काशित दो लंबे शिलालेख हैं। ये शिलालेख शारदा लिपि में संस्कृत और ताकरी लिपि में स्थानीय बोली पहाड़ी का उपयोग करके लिखे गए हैं। ये शिलालेख भारतीय राष्ट्रीय पंचांग (शक संवत) वर्ष 1126 (यानी 1204 ईस्वी) में अहुका और मन्युका नामक दो मंदिर निर्माता व्यापारियों का विवरण देते हैं, इसके अलावा  मंदिर निर्माण के समय के शासक राजा जय चन्द्र का नाम, वास्तुकारों के नामों की सूची और दाता व्यापारियों के नाम भी शामिल हैं। अन्य शिलालेख में कांगड़ा जिले के पुराना नाम - नगरकोट का उल्लेख है
मंदिर की दीवारों पर कई प्रतिमाएँ बनाई गई हैं। इनमें से कुछ मुर्तियाँ एवं प्रतिमाएं वर्तमान मंदिर से पहले बनी हुई हैं। मंदिर में यह मुर्तियाँ एवं प्रतिमाएँ हैं: भगवान गणेश, भगवान हरिहर (आधा भगवान विष्णु आधा भगवान शिव), कल्याणसुन्दर (भगवान शिव और देवी पार्वती की शादी) और भगवान शिव द्वारा असुर अन्धक की हार, की प्रतिमाएं है यहां से चंडीगढ़ के लिए मंडी के लिए एवं पठानकोट के लिए वाहन मिल जाते है , हमने थोड़ा घुमाई की चाय नास्ता किया और कुल्लू के लिए बस मिल गई तो हम कुल्लू निकल लिए , एक रोचक घटना यहां भी घटी रास्ते मे सुहानी धूप के कारण मुझे लग गई नींद , अब दीपक भाई शिमला , मंडी , मनाली मोड़ पर बस खड़ी हुई तो उतर गए सिगरेट पीने के चक्कर मे ध्यान नही दिए बस निकल गई अब दीपक भाई पीछे पीछे ओर बस आगे आगे , दो तीन मोड़ निकल गए तब ड्राइवर ने साइड ग्लास में  देखा कि दो टोपी वाले मेरी बस में है तो ये एक कौन है वैसा ही जो दौड़ लगा रहा है तब उसने बस रोका , दीपक भाई मुझे जगा कर हांफते हुए पूरी किस्सा बता रहे , पर में सोचा कि फेक रहा है , जब कंडक्टर ने बोला सही है साहब आप तो सो रहे थे आपका दोस्त रह जाता , अगर नही देखते तो , दुख भी हुआ , दिखाने के लिए , ओर जबरदस्त हसीं भी आ जाये , दीपक भिन्ना गया , लो भाई हम पहुच गए कुल्लू  पर पहुचकर ऐसा लगा यहां रुकने से अच्छा है मनाली निकल जाएं , तो हमने डिसाइट किया और  निकल लिए मनाली , मनाली पहुचते पहुचते शाम हो चली थी यहां के विषय मे जानकारी हमे थी नही , बस के ड्राइवर से यहां कोई धर्मशाला के विषय मे जानकारी ली तो पता लगा धर्मशाला तो नही है, पर तुम लोग सब से आखिरी में उतरना बस इतना ही बोला , हम आखिरी सवारी उतरते तक बैठे ही रहे मेने ध्यान दिया कि 2 बन्दे हम पर नजर रखे है , 
जब नीचे उतरे तो एक बोला साहब छावनी जाओगे या कमरा दिलाऊं , वो हमें भारत तिब्बत सीमा सुरक्षा बल का जवान समझ रहा था ।  हमने बोले कमरा सस्ता सा , तो दोनों भिड़ गए कि ये कस्टमर किसका है , इसका फायदा हमने उठाया और लगवाई बोली सम्भवतः उस समय सीजन आउट होने लगता है इसलिए दोनों एजेंट कम करते करते 90 रुपये तक आ गए , लमने कहा चलो , कश्यप लॉज बस स्टैंड के सामने ही है कमरा भी जबरदस्त , पूरा कॉलिन बिछा है टीवी , गर्म पानी के लिए गीजर , हर प्रकार से अपटूडेट ,
 अब आगे की यात्रा वर्णन अगले अंक में ...............

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