एक लंबी यात्रा , अच्छा अनुभव भाग - 4

अमृतसर दर्शन --- मित्रों पिछले अंक में हम अमृतसर पहुच गए थे ,जानकारी के आभाव में हमे होटल में रुकना पड़ा, तो भाई हमने होटल में फ्रेश होकर अभी ही गोल्डन टेम्पल जाने का विचार किया , एक उत्सुकता थी टेम्पल देखने की सो निकल पड़े रिक्से वाले ने कुछ दूर ही छोड़ दिया वहां से पैदल गए , गुरुद्वारे की भव्यता देखते ही बनती है बहुत बड़ा मैदान जहां एक ओर जूते ओर समान रखने का स्थान है , वहां लोग सेवा कार्य करते है , मेन गेट से अंदर जाते समय पैर धोकर ओर सर में कपड़ा बांधकर ही जाना होता है जो कि वहां की परंपरा है अंदर जाते ही में तो वही का वही खड़ा रह गया , मात्र जिसकी तस्वीर देखी हो वह साक्षात सामने देखने को मिले तो यही स्थिति होगी रात्री में लाइटिंग में सुनहरा रंग और भी अधिक चमकीला हो जाता है , बहुत बड़ा परिसर जिसमे परिक्रमा मार्ग है , बीच मे पवित्र सरोवर , महिलाओं के नहाने के लिए विशेष व्यवस्था बनी हुई है , लाइन ज्यादा नही थी सो दर्शन जल्दी हो गए ,पूरी परिक्रमा कर हम भंडारे की ओर गए यहां प्रतिदिन लाखों आदमी निशुल्क भोजन करते है , वही गुरु रामदास धर्मशाला भी है ,कुछ देर वही घूमने के बाद हम वापस होटल आकर सो गए , 
दूसरे दिन कमरा छोड़ दिया वो होटल वाले सामान कुछ देर रखने के भी पैसे मांगने लगे , हमने कहा मात्र दो घण्टे के लिए रख लो हम उठा लेंगे , वह मां गया , हम जलियांवाला बाग गए एक जबरदस्त किस्सा यहां भी हुआ , में वही चौक में खड़े होकर लोगो से पूछ रहा कि भाई जलियांवाला बाग कहा है लोग मुस्कुरा कर चल देते , बाद में मैने रिक्से वाले को रोका उसको जलियांवाला चलने को बोला तो वो हसने लगा , ओर बोला पीछे देख , यही है , पीछे जब गौर से देखा तब छोटा सा बोर्ड दीवाल पर टँगा हुआ था , एक छोटा सा गेट , अब तो बहुत बदल गया वहां , पहले साधरण ही था , खुद पर हसी आई , हम गेट से अंदर गए , अंदर बहुत बड़ा बाग है , 1919 को बैसाखी के दिन सम्मेलन कर रहे निहत्थे लोगो पर जनरल डायर ने यही गोली चलवाई थी सेकड़ो लोग मारे गए थे , उन्ही की याद में संरक्षित क्षेत्र है यहां म्यूजिम शहीदी कुंआ , पुराना मंदिर , दीवारों पर फंसी गोलियां सब संरक्षित है , यहां  देख उस दौर में हुए नरसंहार को महसूस किया जा सकता है । यहां से घूमते हुए हमने मारवाड़ी राममंदिर में रुकने की जगह पूछी , वहां शादी थी वरना कमरे मिल जाते , खैर उन्होंने एक जगह बताए , हमको पूरा समझ नही आया , जब रिक्से वाले से उस जगह का नाम लिया तो उसने पूछ ही लिया,  किधर से आये हो , हमने कहा एमपी बोला पहली बार हमने कहा हां , पर क्यों ? बोला कुछ नही साहब ओर बात करते करते उस जगह पहुच गए , बड़े गेट में बोर्ड पढ़कर समझ गया कि वो क्यों पूछ रहा था । जब राममंदिर में हमे पता बताया गया तो हमने समझा लुधियाना मंदिर, धन्वन्तरी धर्मशाला । ओर जहां पहुचे उसका नाम दुर्ग्याणा मंदिर बीबी  धनवंत कौर धर्मशाला । यह भी खूब रही , यहां कमरे मिल गए , तुरन्त वापस गुरुद्वारा वहां मेने नहाया दीपक होटल में ही नहा लिया था , लंगर गए भोजन किया , वापस होटल  सामान उठाकर सीधे दुर्ग्याणा मंदिर 
16 रुपये कमरे के है कम्बल के अलग गर्म पानी के अलग ,कुल मिलाकर हमारे लिए तो जन्नत , 
सामान रख , वही से ऑटो लेकर बाघा सीमा गए 150 मांगा था दोनों का आने  जाने का , पर उसे दो सवारी ओर मिल गई तो हमने 100 ही दिए  यहां पर आधा किलोमीटर पैदल ही जाना होता है भीड़ पहले से बहुत हो गई थी , शाम को झण्डा उतारते समय की परेड बहुत ही रोमामचकारी होती है , यहां सैनिक विशेष तैयारी से होते है , गेट के उस ओर पाकिस्तान है और वहां के लोग भी यह देखने आते है , दोनों तरफ से नारेबाजी होती है , यहां फोटो खिंचवाई वहां लोग सीडी भी बेचते है , हमने भी ले ली , वापसी में वैष्णो माता मंदिर भी गए एक माता जी ने इसे बनवाया है ऐसा मंदिर हरिद्वार में भी है ,बहुत बड़ा है सुंदर भी ऑटो वाले ने हमे दुर्ग्याणा मंदिर के गेट में छोड़ दिया , हमने मुह हाथ धोया ओर नीचे शीतला माता मंदिर के दर्शन किये , यहां एक हनुमान जी का प्रशिद्ध मंदिर है , मान्यता है कि रामायण काल मे लव कुश द्वारा अश्वमेघ का घोड़ा पकड़ा गया , उसे छुड़ाने जो आया सब हार गए हनुमान जी को भी एक पेड़ में उन्होंने बांध दिया था कहते है यह वही स्थान है । यहां ग्रीष्म की नवरात्रि छेत्र नवरात्रि में बहुत बड़ा मेला भरता है , जिन्हें सन्तान नही होती वे यहां मानता करते है कि हमारी जब सन्तान होगी तो उसे यह लाएंगे ओर आपकी सेना में भर्ती करेंगे , उस समय सैंकड़ो बच्चे लंगूर बन घूमते है , इसी परिसर में लक्ष्मी नारायण मंदिर भी है जो कि गोल्डन टेम्पल का हूबहू है , यहां भी सरोवर है बीच मे मंदिर इसमें भी सोना चढाई का कार्य प्रारंभ है , यहां भी लंगर  चलता है हमने वहां प्रशाद ग्रहण किया ओर कमरे में चले गए । 
आज पिता जी से बात हुई फोन में तो उन्होंने बताया कि अमृतसर के पास घुमान है वहा नामदेव जी महाराज का स्थान है , सो हम कल सुबह वहाँ जाएंगे सुबह जल्दी ही  ,
आज सुबह जल्दी उठकर नहा लिए फिर बस स्टेंड गए बस भी मिल गई थोड़ी देर में 21 रुपये प्रति व्यक्ति किराया है घुमान का रास्ते मे पिंड खजूर ले लिए भूख लग गई थी उसे ही खाये , जब घुमान पहुचे वहां गुरुद्वारा देखा तो आश्चर्य हुआ , 7 मंजिल का गुरुद्वारा है , नामदेव जी महाराज 17 वर्ष यहां तपस्या की है यहां सरोवर है जिसमे 3 रविवार नहलाने से सूखा रोग दूर हो जाता है , परिसर में विद्यालय भी चलता है , भीड़ नही थी फिर भी हमे वहां के सेवादारों ने तुरंत ही भोजन बनाकर खिलाया कुछ तस्वीरें वगेरा लीं ओर वापस निकल गए अमृतसर के लिए शाम हो चुकी थी , धर्मशाला आकर  फ्रेश होकर फिर नीचे गए मंदिर में ही कुछ समय बिताया भोजन कर कमरे में चले गए , सुबह चंडीगढ़ जाना है ,

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