वैष्णों देवी ,शिमला , वृंदावन यात्रा वर्णन भाग - 1
इस अंक में यात्रा सिवनी से वैष्णो माता और पठानकोट तक
22 दिसम्बर 2001
वैसे तो हमारा तय रहता था वैष्णो माता दर्शन करने जाने का ओर इस बार भी बस यही तक तय है आगे राम जाने
मेरे मित्र दीपक बालापुरकर के साथ यात्रा तय है पर कोई और भी तैयार हो जाता था और अंत तक केंसिल भी इस बार भी ऐसा ही हुआ नवल शुक्ला ने एन टाइम पर जाने से मना कर दिया क्योंकि हमारा जाने का निश्चित होता है पर आने का नही । खैर में अकेला नही था इसलिए कोई परेशानी नही थी हां इसी वर्ष हमारा नया मकान बनकर तैयार हो चुका था हमारा गृह प्रवेश जल्द ही करा लिया था धीरे धीरे समान शिफ्ट हो रहा था ,आज पूरा सामान शिफ्ट किया दिन भर । ओर रात 12 बजे बस द्वारा में ओर दीपक निकल पड़े नागपुर की ओर नागपुर से जम्मू के लिए ट्रेन हिमसागर एक्सप्रेस पकड़नी होती है जिसका टाइम 3- 50 फिक्स है रिजर्वेशन करवाते नही , तो बर्थ की चिंता स्वभाविक है , खैर इस बार भी किस्मत अच्छी है बर्थ मिल गई , मेरी आदत थी में 4 करीब बर्थ में सामान रख देता था फिर ट्रेन चलने के बाद व्यक्ति कैसे है देखकर उन्हें बर्थ दे देता हूं (फ्री में भाई ) , वही इस बार भी किया बाद में वैष्णो देवी जा रहे नागपुर के ही व्यक्तियों को बर्थ दे दी , ऐसे में व्यवहार अच्छे बन जाते है और सफर अच्छा कटता है , 23 तारीख सुबह 7 बजे इटारसी ओर रात को दिल्ली फिर सुबह 9 बजे लुधियाना पहुचती है ट्रेन पर रात को गाड़ी के नीचे कोई जानवर आ गया था इसलिए लेट हो गई , आखिरकार हम शाम 5 बजे जम्मू स्टेशन पहुचे फ्रेश होकर चाय नास्ता किया फिर तत्काल ही बस द्वारा कटरा के लिये निकल पड़े ,करीब 09 बज गए कटरा पहुचते पहुचते यही एक धर्मशाला में नहा कर सामान भी यही रख दिया एक जोड़ी कपड़े बस साथ रख लिए ,इसके बाद घर फोन लगाकर अपनी खैरियत की जानकारी दी और पर्ची कटवाकर 12 बजे हमने चढाई प्रारम्भ की आदत अनुसार इस बार भी बगैर रुके भवन तक जाने का प्लान था पर दीपक अर्ध कुमारी दर्शन के लिए रोकने लगा इसलिए वहां रुकना पड़ा भीड़ तो थी ज्यादा पर क्या कर सकते है अब दर्शन करना है तो करना है , सुरक्षा की दृस्टि से चेकिंग बहुत थी इस बार सभी जगह , पर अंदर व्यवस्था गड़बड़ है खेर हमने 2 पर्ची कटाई ओर लग गए लाइन में सुबह 6 बजे दर्शन हो पाए एक तो ठंड अपने चरम पर ओर नींद भी जबरदस्त आ रही थी ओर लम्बी लाइन आप इमेजिन करें कैसा महसूस हो रहा होगा , गुफा में पूरा लेट कर जाना पड़ता है गुफा बहुत सकरी है , यहां माता ने 9 माह गुजारे थे भैरव नाथ से बचकर इसे इसलिए गर्भजून कहा जाता है दर्शन हो गए अब एक बार आराम लग जाता है फिर अलाली आ जाती है ,तो फिर कुछ समय आराम कर ही लिया जाय , कुछ देर आराम करने के बाद फ्रेश होकर चाय पी ओर चढाई प्रारम्भ , करीब 11 बजे भवन पहुचे , वहां सामान आदि रखने की पूंर्ण व्यवस्था है स्नान आदि की भी अतः स्नान कर सामान क्लॉक रूम में जमा करवाये ओर टोकन लेकर लाइन में लग गए ,उस समय एक बात बहुत मन खराब करती है कि जो वीआईपी गेट होता है वहां से आनाजाना होते रहता है , कमसे कम ईश्वर के दरबार मे यह भिन्नता नही होना चाहिए ,मगर क्या कर सकते है पूरे भारत मे यही व्यवस्था है , खैर हमने मातारानी के दर्शन किये और क्लॉक रूम से सामान निकाल कर पैक कर रहे थे तभी एक घटना घटी जिसे में आज भी जब जब याद करता हु रोंगटे खड़े हो जाते है , दीपक ओर में ऊपर सामान पैक कर रहे थे तब दूर से एक लड़के पर नजर गई बिल्कुल गोरा रंग और इतनी ठंड में पतली सी शर्ट , मेने घ्यान हटाया पर बार बार उसकी ओर घ्यान जा रहा था पता नही क्यों ? में दीपक से बोला भी की , उसे पहचानता है क्या ? ऐसा लग रहा है कि वो अपने पास ही आ रहा है , ओर वाकई वह लड़का कुछ देर में हमारे पास ही आ गया और मुझसे बोला कि आप मुझे दर्शन करा दो , में अकबका गया दीपक ने उसे समझाया कि भाई तू लाइन में लग कर जा दर्शन के लिए , मगर उसने दीपक को स्पस्ट बोला आप नही ये में इनको बोल रहा हु , ओर फिर मुझसे कहने लगा कि मुझे पता है आप मुझे दर्शन करा दोगे , मेने आश्चर्य से उसे देखा और बोला बेटा तुम जाकर पर्ची दिखाओ ओर लाइन से जाकर दर्शन करो , वो नही माना मेने पूछा कहा से आया है वो बोला नेपाल से , में बोला नेपाल में कहा से भाई वो बोला काठमांडू से , मेने बोला नाम क्या है वो बोला पशुपति नाथ , में सन्न हो गया , मेने उससे पूछा कि तुम्हे कहि चेक नही किये बोला नही , आश्चर्य भी हुआ जबकि इस बार चेकिंग कुछ ज्यादा ही थी खच्चर तक को चेक किया गया एक दो पोस्ट पर , ओर नीचे पहले गेट में पर्ची देखी ही जाती है वही सील लगी पर्ची को ऊपर दिखाना पड़ता है तब दर्शन हो पाते है अन्यथा नही , में सोच में पड़ गया अचानक मुझे ध्यान आया कि , नीचे पर्ची कटाते समय दीपक बोला था कि अपन दो बार दर्शन करेंगे ,मेने मना किया था उसने खुद के नाम की भी पर्ची अलग से ले आया उसमे भी 2 व्यक्ति लिखवाकर , ओर मेने भी किन्तु मेने जो पर्ची लाया था वो जेब मे ही थी दीपक की पर्ची से हम ऊपर तक आये और दर्शन किये थे , वो मेरे द्वारा कटाई पर्ची मेरे ही पास थी , मेने उस लड़के को वह पर्ची दिया और काउंटर का पता बताया कि वहां जाकर टोकन ले लेना , वो चला गया हमने बेग पैक कर देखा तो वो कहि दिखाई ही नही दिया में काफी दूर तक ओर पूरी लाइन में देख डाला वो लड़का कहि नही दिखा ,
मेने दीपक को बोला देख मातारानी सब देखती है हमने डबल पर्ची लिए उन्होंने इसका भी ध्यान रखा और यह लड़का हो नहो बोले बाबा ही थे , मन ही मन प्रणाम किया ,ओर उसी की चर्चा करते हुए भैरो बाबा के दर्शन को चल दिये , पूरा रास्ता हमने अधिकांशतः सीढ़ियों से ही चढ़े दर्शन कर नीचे उतरे तो अर्ध कुमारी से थोड़ा नीचे आ गए फिर वापस गए और आराम करने की चाहत लिए अर्ध कुमारी में कम्बल लेकर धर्मशाला में सो गए ,यहां भी प्रति कम्बल के 100 रुपये जमा कराए जाते है ,जब आप वापस करते है तो रुपये वापस कर देते है , रात भर हल्ला होते रहता है आने जाने वालों के कारण ओर लगातार होने वाली अलाउंसिंग के कारण और मुझे है कि, हल्ले में नींद नही आती । में सुबह जल्दी उठकर फ्रेश होकर बाहर खड़े होकर आसमान के नजारे ले रहा था यहां धूप जब निकलती है तो उसकी किरणे पहाड़ पर पड़ती है तो पहाड़ पूरा लाल रंग की रोशनी से नहाया हुआ दिखता है , थोड़ी देर बाद दीपक भी उठकर आ गया हमने चाय नास्ता कर उतरना शुरू किया 12 बजे करीब कटरा आ गए यहां पहुचने के पूर्व गुलशन कुमार के भंडारे में भरपेट भोजन किया उसके बाद धर्मशाला में आकर नहा कर सामान बैग उठाया और बस से जम्मू ।
पठानकोट जाने के लिए 3- 30 की ट्रेन निकल गई अब 6 - 30 पर है फिर क्या करें हमने शिव मार्केट जाकर घुमाई की शाल /अखरोट वगेरा लिए ओर स्टेशन में समय काटा फिर ट्रेन द्वारा पठानकोट आ गए रात को 10 से 11 कर बीच , यहां से सुनील भैया के भाई जो आर्मी में है उन्हें फोन लगाया पर फोन नही उठ पाया , तब हमने वही खाना लेकर खाया और स्टेशन में ही जगह देखकर सो गए । कल चामुंडा देवी दर्शन को जाना है 6 बजे ट्रेन है तब तक के लिए प्रणाम
आगे बहुत कुछ है यात्रा वृतांत अगले अंक में .............
मातारानी का दरबार
वैष्णों माता के दर्शन हेतु राह में
थोड़ा घोड़े की सवारी करके देखी जाए , बस फोटो के लिए
सांझी छत में
माता का दरबार
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