मेरी अधूरी अमरनाथ यात्रा भाग - 2

24 तारीख आज पानी नही गिर रहा है 
सुबह फ्रेस होने नदी पर चले जाते हैं ।यहां लिद्दर नदी है जो ऊपर ग्लेशियर से आती है ,कुछ स्थानीय लोग चोरी भी करते है एक कश्मीरी दिखा नदी पर बेग खोलते हुए ,नास्ता चाय करके ऊपर पहाड़ी पर चले गए , वहां से लौटकर बाबा जी लोगो के पास बैठ गए , यहां औघड़ बाबा जी भी अपना डेरा लगाए हुए है , में उनसे मिलता हु , वो जानते है मुझे इसलिए कुछ नही कहते , आज वह एक चमत्कार देखा । शंकर मुरारी भैया के साथ था में अकेले आ गया था आकर बाबा जी के साथ बेठ गया , बाबा जी ने हाथ हिलाकर सिगरेट निकाले , फिर मेंने खाना खाने जाने की बात बोल कर उठने लगा तब उन्होंने वहीं  खाना ला दिया , में तो दंग रह गया । हरियाणा से भी बाबा जी लोग आए है वे बहुत सुंदर गीत गाते है , उनके साथ नाचते गाते बहुत अच्छा लगा एक तस्वीर भी है , आज भी बहुत लोग मारे गए है , कहते है ऊपर ठंड बहुत बढ़ गई है वहां लोग खड़े खड़े गिर गए ओर मर गए  है , टीवी पर बहुत कम बताते है पर स्थिति कुछ और हे । आज घर फोन लगाने की सोचा रात को खाना खा कर टेलीफोन बूथ पर खड़ा हो गया बहुत समय बाद नम्बर आया तो फोन का उपयोग न के बराबर करने के कारण शहर का कोड भूल गया परंतु लाइन से हटना पड़ा , जब मुरारी भैया से पूछकर आया तो वहां फिर से लाइन में लगना  पड़ेगा यह सोचकर  में नही गया फिर , ओर वो मीटर से पैसे नही ले रहा था , घड़ी का कांटा देख कर पैसे ले रहा था एक मिनिट के 100 रुपये , अपने पास पैसे भी नही थे ज्यादा , ।
आज 25 तारीख है शंहर में 2 लाख के करीब लोग है यात्री मिलाकर । 
भीड़ ओर पानी के कारण आंख आने की बीमारी फेल गई है मुरारी भैया को भी आंख आ गई शंकर को भी मेरी आँख गढ़ रही पर अभी नही आई मुरारी भैया को बुखार भी है । वो तो बढ़िया रोज सामने वाले भंडारे में चले जाते और काम करते रहते थे हमे चाय नास्ता खाना सब अच्छा मिल जाता था , पर आज वो बस में ही लेटे रहे , आज धूप अच्छी है , नदी जब गए थे तब मैंने देखा कि एक कश्मीरी डब्बे से पानी निकाला अपने ऊपर डाला और हो गया , तो मेने भी ऐसा ही किया पर अपना तो  अकड़ गया शरीर , बहुत मुश्किल से बस तक आये,पूरे शरीर मे  सरसो का तेल लगाएं , ओर बस के ऊपर जाकर लेट गए , नींद भी लग गई , अचानक एक आवाज के कारण नींद खुली देखा तो सब यहां वहां भाग रहे है , पता लगा दुकानों में भारी तोड़ा फोड़ी हो गई है , घटना यह हुई कि यहां  बजरंग दल के लोगो से पुलिस वाले बदतमीजी से बात करते है गाली देते है, कहते हैं कि क्यों आये हो यहां, यहां दुकान वाले 2 रुपये की बिस्किट 15 से 20 रुपये की दे रहे है हर चीज मेंहगी , ओर गन्दे तरीके से बोलते है , कमाते भी हमसे है खाते भी यहां का है ओर गाली भी देते है , इसी कारण एक दुकान वाले से किसी बजरंगी की हातापाई हो गई पुलिस ने उल्टा उसी बजरंगी को मारा ,तो सब भिड़ गए पुलिस को ठोकने   , बाद में शंहर से पुलिस हटाकर आर्मी लगाए जाने की शर्त पर विवाद शांत हुआ , हमने भोजन आदि किया फिर वही दिन चर्या   यहां वहां घूमना ओर वापस बस के नीचे । आज  बस के नीचे देखा तो वहां  एक  छोटा बेग  है ,उसे देख हमारी हालत खराब , एक तो लग रहा है कि कुछ पैसे वगेरा होंगे , फिर लगा कि बम वगेरा न हो ? असमंजस में बैठे रहे , फिर मेने शंकर को बोला कि मुरारी भैया को बोल की  बस से निकल कर  दूर जाओ , फिर हिम्मत करके धीरे धीरे उस बेग के  पास जाकर  कान लगाकर सुना तो कोई टिकटिक की आवाज नही आ रही थी , भाई उस समय तो बम में टिकटिक की आवाज ही आती थी फिल्मों में , फिर क्या है उसे धीरे से खोला गया , साला खोदा पहाड़ निकली चुहिया , वाली कहावत सिद्ध हुई शंकर बोले कि भैया कुछ पैसे है क्या मेने उसे जब दिखाया तो वो भी हंस दिया , उसमे दाढ़ी बनाने का सामान ओर कुछ पुड़िया पान पराग जैसे थे , आज इतने दिनों में हंसने का यह एक कारण बना , हमने पान मसाले की पुड़िया दबाई ओर ईमानदारी की मिसाल बनकर बस में उद्घोषणा की , भाई बेग किसका है ? एक सज्जन जो खुद को ललितपुर का टीआई बता रहे थे वे बोले हमारा है , हमने उन्हें बेग के साथ अपने  सामान की हिफाजत करने की नसीहत भी दे डाली ।  आज आर्मी वालो की आवा जाहि बहुत ज्यादा है , में ओर शंकर बस के नीचे सो गए मुरारी भैया बीमार है इस लिए वे बस में सोए । सम्भवतः कल रास्ता खुल जाए क्योंकि अमरनाथ यात्रा तो पूरी तरह बन्द कर दी गई है लोगो को खोजा जा रहा है , जो लापता हुए है , डेथ बॉडी ही मिल रही है अधिकतर , भंडारों में खाना खत्म होने लगा है  क्योंकि आने का कोई साधन ही नही बचा , भंडारे वाले खुद का राशन भी लोगो को बांटने लगे है , बड़े प्रेम से कहते है प्राजी इतने से ही काम चला लो , उनकी यह भावना देख 4 पूड़ी में भी पेट भर जाता है । 
पहलगाम  आज पूरे भारत से जमीन ओर आसमान दोनों सम्पर्क से कट चुका है , ईश्वर करे कल  खुल जाए रास्ता यह सोच कर फिर सो गए ।
26 तारीख सुबह फ्रेस होकर आए नास्ता चास्य तो मिल गया आज रास्ता खुलने वाले है काफी लोगो ने बताया , हम चाय के बाद खाने की लाइन में लग गए , करीब डेढ़ बजे नम्बर आया बहुत ही प्यार से बोला गया आज यही है बेटा ओर उन्होंने तीन पूड़ी दी , ओर अचानक सायरन की आवाज आने लगी जो लगातार बज रही थी , में समझ गया और 2 पूड़ी खाया एक बगल वाले को दिया , ओर दौड़ लगाया बस की ओर , आकर बस में बेठ गए , आज सच मे रास्ता खुल गया बस चल पड़ी अजीब सी खुशी थी बस रुकते चलते 04 बजे अनन्त नाग छावनी में रोकी गई , रास्ते मे वह रास्ता भी मिला जो खाई में गिर गया जिसे आर्मी वालो ने पहाड़ी काट कर कच्चा बनाया है पूरे यात्री उतर जाते है जब वाहन तेजी से निकाला जाता है , उसकी भी तस्वीर है , आज शाम छावनी में है । 
यहां बहुत कड़ा नियम है अत्यधिक आतंक ग्रसित क्षेत्र है यह , ऊपर चढ़ने के पहले पता लगा कि करीब 2 बजे फायरिंग हुई है आतंकियों ओर आर्मी वालो के बीच , यहां गाओं वाले भी आतंकियों का सहयोग करते है , एक ओर वाक्या  हुआ यहां हमने एक लोकल छोटे बच्चे  को बुलाया जो दाल बेच रहा था , हमने उससे बोला कि इन जगह को क्या कहते है , उसने गुडपवा बोला हमने डायरी में लिख लिए , फिर  रात वही बस में ऊपर सो गए , 
आज सुबह 27 तरीख सुबह आर्मी वालो से मिला धन्यवाद दिया तस्वीर निकाली , मेंने उनसे कहा कि आप गुडपवा मे कब से है ? वे चौक गए बोले कहां ? मेने कहा गुडपवा । तो बोले किसने बताया मेने कहा लोकल बच्चे ने , वो सैनिक हसने लगा , बोला आप कुछ खा रहे थे क्या उस समय ? में ने हा कहा और पूरी बात समझ आ गई , हम खा रहे थे गुड़ और पाव 
लड़के ने उसका नाम समझा इस लिए बोला कि गुडपवा .. हाहाहा 
खेर सुबह 7,30 पर यहां से निकले फिर नया लफड़ा , कुछ बन्दूकघारी हमारी  बस में चावल  दाल के पैकेट डाल रहे थे , मेने वापस पीछे से फेक दिया लोकल बच्चे मांग रहे थे उन्हें देते गए मेरे देखा सीखी ओर लोगो ने भी ऐसा किया मेने बोला कि शायद वो आतंकी हो बंदूक बड़ी दाढ़ी कुछ जहर मिलाकर दिया हो , सेना वाले ने तो नही बताया था ऐसा कुछ  , खेर दोपहर बाद 4 बजे तक रामबन पहुचे , रामबन हिन्दू बहुल्य  क्षेत्र है यहां रुकने की व्यवस्था  थी  ,पर सारे टूट पड़े दाल चावल के भंडारे पर , तब वहां पता लगा कि वो  अनन्त नाग में बन्दूकघारी लोग आतंकी नही थे , वे सेना के साथ मिलकर काम करते है उन्हें बंदूके सेना ने ही दी है , बहुत ही हसी आई खुद पर , ओर कुछ लोगो ने गुस्सा निकाला हम पर , किन्तु क्या किया जा सकता है । जहां हम रुके थे  यहां लोकल परिवार भी आ गए है सारे लोग अंताक्षरी खेल रहे है परिवार जैसे लगा , आज   28 तरीख  सुबह 06 बजे यहां से चले एक दो जगह भूस्खलन हुआ सेना वालो ने जैसे तैसे गाड़ी निकलवाई , 
हम जम्मू न जाकर कटरा चले गए मुझे बुखार भी सर्दी और थकान ऐसा लग रहा था कि सो जाएं पर कहाँ , हमने रात को 12 बजे वैष्णो माता दर्शन हेतु पहाड़ी चढ़ना शुरू किया था रास्ते मे भारी बारिश ,पहले  यहां शेड हर किलो मीटर पर ही होते थे अब तो पूरे मार्ग में है , जाली भी नही लगी थी बारिश के कारण बैठना पड़ा , में तो नींद के झोंके में गिरते गिरते बचा ,फिर भी  में थोड़ा जल्दी ऊपर पहुच गया सोचा आराम किया जाए शंकर ओर मुरारी भैया आ जाएंगे , पर नींद लग गई करीब दो घण्टे सो लिया ये लोग भी आ गए थे ,
सुबह 6 बजे तारिख 29   वहां झरने के पानी मे नहाया पूरी थकान बुखार खत्म , माता रानी के दर्शन जीवन में पहली बार हुए में धन्य हो गया , तत्काल वापसी की गई , अंधेरे के पहले नीचे आ गए , ओर बस पकड़ कर सीधे जम्मू स्टेशन , यहां अमरनाथ यात्रियों के लिए स्पेशल ट्रेन लगी है , खाना की यवस्था भी है बाहर , हमने भोजन किया और बर्थ में बेठ गए , नीचे बाबा जी लोग थे , उन्होंने जिद करके चिलम पिला दी मुझे गन्नाटे आ गए जो नींद लगी तो दिल्ली में उठा , जब आने सिर के पास फल दूध , खाना बिस्किट के पैकेट देखा , तो मुरारी भैया को बोला , की यार पैसे है नही ओर तुमने इतना खर्च क्यों किया ? तब उन्होंने बताया कि रास्ते मे सरदार जी बांट रहे थे लुधयाना में , मेने बताया कि तुम सो रहे हो , तो उन्होंने यह सब खुद यहां रख दिया , बोले सोने दो सुबह खिला देना , मेरी आँखों से आंसू आ गए , इतनी बुरी परिस्थिति में भी ये लोग हमारी कितनी सेवा कर रहे है , 
तारिख 30 दिल्ली पहुचे ,  वहां से ट्रेन से  मथुरा और मथुरा से भी आज ट्रेन से ही गए  बृन्दावन मेरी नानी के घर मुरारी भैया सागर निकल गए थे में ओर शंकर ही है , नानी से मिले फिर बृन्दावन घूमकर आये और सो गए , 
आज 31 तारीख आज भी घुमाई हुई दोपहर में खाना खाया थोड़ा आराम कर के फिर नानी से विदा लिया शाम को मथुरा से ट्रेन में बैठे हम सोचे यात्रियों वाली ट्रेन है पर वो कल से ही बन्द हो गई , अब पुलिस वाले परेशान करने लग गए , पैसे की मांग की हमने तो नई दिए बोले जो बने कर लो , फिर वे कुछ नई बोले , 
आज 1 तारीख को वापस जबलपुर जबलपुर से बस से सिवनी  , अब जैसे ही शहर आये अपने अपने होते है पता लगा हफ्ते भर गालियां पड़ी की साले फोन लगाते नही बनता था खबर तो देना था , उनकी गालियों ओर डांट में जो प्रेम था वो नही भूल सकता कभी  , दुर्गा चौक वाले पुजारी मामा भी नही रहे खबर उड़ गई थी फिर मेने बताया कि वो मिले थे मुझसे भी , वे अपने गांव चले  गए है , यात्रा तो खत्म हुई पर  हिमाचल ओर कश्मीर के द्वार यात्राओं के लिए  खुल गए , आज तक माता वैष्णो देवी के दरबार करीब 09 बार हाजरी दे चुका हूं , तो मित्रो जय श्री राम अगली यात्रा के साथ फिर मिलते है ,

हम स्वयं बस पर बैठे हुए

मुरारी सोनी जी एवं शंकर कश्यप

पहलगाम के नजारे

ये वही सड़क है जिसके कारण पहलगाम में रुकना पड़ा

माता वैष्णो देवी के दरबार मे 

अनन्तनाग छावनी में 

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