वैष्णो देवी , शिमला , वृंदावन यात्रा भाग - 2

मित्रों  पिछले अंक में आपको बताया था , की वैष्णो माता के दर्शन कर रात को ही हम पठानकोट आ गए , रात यही  स्टेशन में ही गुजारी , यहां से हिमाचल प्रदेश के स्थलों के लिए छोटी लाइन ट्रेन चलती है जो कि लगभग 4 ट्रेन  है  जो जोगिंदर नगर , बैजनाथ रुट पर चलती है , समय ज्यादा जरूर लगता है मगर सफर सुहाना होता है , हमने भी सुबह जल्दी उठकर नहा धोकर चाय नास्ता किया और  06 बजे निकलने वाली पठानकोट जोगेन्दर नगर ट्रेन पकड़ ली हमे मरांडा में उतरना है लगभग 3-30 पर मरांडा पहुचे , हिमाचल में ट्रेन में अमूमन चेकिंग नही हुआ करती ओर हां अपने तरफ ट्रेन में लिखा रहता है , की बगैर टिकिट यात्रा करना दण्डनीय अपराध है । 
ओर यहां लिखा रहता है " बगैर टिकिट यात्रा करना सामाजिक अपराध है । 
शायद इसी लिए यहां के लोग ज्यादातर बगेर टिकिट ही यात्रा करते है , खैर मरांडा उतरकर ऊपर ढाबे में रोटी खाकर हमने बेग उठाया और निकल पड़े हम सोचे पालम पुर यहीं कोई गांव है नजदीक चले जा रहे है रास्ता बहुत सुंदर पहाड़ी वनों से भरापूरा ,कुछ दूर जाने पर पता लगा कि भाई पालमपुर जो है वो अभी दूर है और बस से जाना पड़ेगा , एक भाईसाब मिले जिनका नाम था अजय कुमार उसने पूछा आप पालमपुर क्यों जा रहे है ? हमे उस दौर में कोई ज्यादा जानकारी थी नही हमने कहा कि चाय बागान देखने । वो बोला अगर चाय बागान ही देखना है तो मेरे साथ चलो में दिखा देता हूं में इसी कम्पनी में काम करता हु , उसने हमें बागान ले गया अभी कटिंग नही हुई है पर घुमाया उसने पूरा , वहीं चाय भी बनाकर पिलाया , फिर हमने पालमपुर जाने का  इरादा केंसिल किया , ओर वापस मरांडा बस सटेंड आये टेक्सी द्वारा मल्हां पहुचे फिर यहां से बस मिली 
 कुछ ही देर बाद चामुंडा मंदिर पहुच गए वहां चाय दुकान में रुककर चाय पी ओर वहां रुकने की जानकारी पता लगाई वहां पता चला कि रुकने हेतु धर्मशाला है होटल भी है हमने मंदिर परिसर में ही धर्मशाला में रूम बुक कराया फ्री है पर जाते समय रसीद कटवाने को बोला जाता है सामान कमरे में रखकर मंदिर गए हमने बाहर ही पैर पड़कर प्रणाम किया , हमे जो कमरा मिला उसके बगल में ही शिवलिंग है मंदिर के बगल में ही भंडारा चलता है वहा जाकर भोजन ग्रहण किया ,फिर एसटीडी बूथ से घर फोन लगाकर बात की , उसके बाद ,जल्द सो गए क्योंकि सुबह जल्दी उठना है सुबह की आरती मिलाने के लिए ।
आज 28-12 सुबह भोर होते ही उठ गया में दीपक थोड़ा लेट उठा मेने जल्दी ही स्नान आदि किया फिर हम मंदिर गए बहुत ही सुंदर तरीके से आरती होती है , हिमाचली बोली वैसे भी मीठी है और उसी टोन में जब वे आरती गाते है तो अलग ही अनुभूति होती है , बाद में शिव जी की आरती हुई , मंदिर के साथ ही एक सरोवर है सरोवर के नीचे नदी बहती है , नदी पर एक सुंदर पल बना है वहा से पहाड़ो पर गिरी बर्फ स्पस्ट दिखाई देती है , नदी के पार नागा साधुओं का डेरा है वहा भी जाकर दर्शन किये चामुंडा देवी मंदिर प्रशिद्ध शक्ति पीठ है यहां तंत्र साधना हेतु बड़े बड़े साधक आते है । इसके उपरांत सामान लेकर बस से धर्मशाला के लिए निकले ज्यादा दूर नही है । धर्मशाला बस स्टेंड में हमने एक दुकान मे सामान रख दिया उसने लॉकर व्यवस्था कर रखी है , वहां से टैक्सी द्वारा हम मैक्लॉड गंज चले गए , 06 रुपये लिए एक व्यक्ति के टेक्सी वाले ने  मैक्लॉड गंज का रास्ता बहुत सुंदर है बहुत ऊंचाई पर भी है घुमावदार सड़क से होते हुए मैक्लोडगंज पहुचे , यहां बौद्धों की निर्वासित सरकार को पनाह दी गई है भारत सरकार द्वारा बहुत बड़ा बौद्ध मंदिर है दलाई लामा जो बौद्धों के गुरु है वे यहां रहते है , अभी तो नही है वे 3 माह बाद लौटेंगे , यहां पर इनके भगवानों की मूर्तियां है , मानक चक्र भी लगे है जिन्हें मंत्र पढ़ते हुए घुमाया जाता है , कुछ देर वहां रुककर हम भगशु नाग मंदिर गए लगभग 2 किलोमीटर है वहां  झरना भी है किंतु अभी वहां ज्यादा पानी नही है सो नही गए भगशु नाग मंदिर में शिवलिंग है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह प्राकृतिक रूप से बढ़ रहा है , वहा से घूमकर मार्केट गए सामान तो बहुत सुंदर और एंटीक पर रेट महंगे है , मैक्लॉड गंज  घूमकर हम करीब 05 बजे लौट गए धर्मशाला आकर सामान उठाया और बस से ज्वाला देवी आ गए ज्यादा दूर तो नही पर  रास्ता पहाड़ी ओर घुमावदार है हम 9-30 पर ज्वाला जी पहुचें मंदिर बन्द हो चुके थे , ओर भीड़ भी ज्यादा थी धर्मशालाएं भरी हुई थी जैसे तैसे गीताधाम धर्मशाला में जगह मिल गई 
खाना वगेरा खाया,पर  मुझे यहां की सब्जी बिल्कुल पसंद नही आती फिर भी , खाना खाकर हम सो गए ,
आज सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान कर मंदिर गए अच्छे से दर्शन हुए ज्योत स्वरूप माता यहां विराजमान है , अकबर का छत्र भी देखा , ज्योत का पता लगाने के लिए विश्व भर के वैज्ञानिकों ने जमीन आसमान एक कर दिया पर पता नही लगा सके , हम मंदिर से निकल मार्केट में गए वहां पराठे खाये ओर धर्मशाला से सामान उठाकर बस स्टैंड पहुचे , हमे अमृतसर जाना है , परन्तु बस बहुत देर कर रही है बस वाला जालन्धर तक ले जाएगा वहां से अमृतसर के लिए बस मिलेगी , अचानक एक बस सामने से निकल रही थी हमने सामान निकालकर उस बस में रखकर बेठ गए , करीब 07 किलोमीटर चल गयी होगी बस तब कंडक्टर बोला कि भाई जाना कहा हैं , हमने पूछा कि बस कहाँ जा रही है ? उसने बोला आपको कहां जाना है ? हमने कहा बस जहां जा रही है वहां ,वो बोला बस शिमला जा रही है , हमने कहा शिमला चलो , ओर टिकिट कटा लिया और निकल पड़े शिमला के लिए रात होते होते हम शिमला पहुच गए , यहां भारी भीड़ है काफी सैलानी आये हुए है 31 दिसम्बर के कारण नया साल हिल स्टेशन में कौन नही मनाना चाहेगा । हमने सस्ता सा कमरा ढूंढना चाहा पर इस समय मुश्किल दिखाई देता है एक धर्मशाला मिली धर्मशाला जैसी होटल कह सकते है ,सेठ पूंर्ण मल कुंदयाल धर्मशाला हमने वहां पता किया तो कमरे तो बुक से सारे हॉल में बेड की व्यवस्था है 15 रुपये ओर लॉकर के 05 रुपये अलग से हमने कहा चलो छत तो मिली कमरे का करना भी क्या है
 आज रविवार सुबह 8 बजे उठना हुआ  गजब की कड़ाके की ठंड है फिर भी आदत अनुसार नहाया जरूर पर ठंडे पानी से दीपक बाद में उठा उसने नही नहाया ठंड के कारण फिर  हम घूमने निकल गए , रास्ते मे पराठो का नास्ता हुआ  नास्ता कह रहे है पर हमारा तो खाना भी यही हो जाता है । शिमले में अभी बर्फ नही है आगे कुफरी में है पर हमें आज शाम को ही वापस लौटना है इस हिसाब से हम शिमला ही घूमना चाहते है घूमते हुए मेने एक दुकान वाले से पूछा कि कोई हनुमान जी का मंदिर है क्या , मेरी आदत हर दिन हनुमानजी के दर्शन की है जहां भी जाता हु मंदिर जरूर ढूंढता हु , उसने जाखू मंदिर के बारे में बताया हम बतावे हुए रास्ते पर चलते हुए एक बड़े से मैदान पर पहुचे वहां लोग धूप सेंक रहे थे फोटोग्राफी कर रहे थे , अच्छी जगह है वह हमने भी वहां समय गुजारा तस्वीरे भी ली वहां एक चर्च भी है पुराना है वहां से फ्री होकर अपने लक्ष्य पर चले घुमावदार रास्तो से होते हुए आगे बढे जा रहे थे अचानक में दीपक को आगे रास्ता खराब होने की जानकारी देने लगा बड़े बड़े पेड़ और बन्दरो के आतंक की बताया दीपक भी आश्चर्य चकित हो गया और साथ ही में भी हुआ यह कि करीब तीन वर्ष से मुझे एक सपना आता था उसमें ऐसे रास्ते पेड़ फिर बन्दर उसके बाद हवन धूप की सुगन्ध फिर झंडे बस इतना ही मेने अपनी डायरी में ऐसा ही नक्शा भी बना रखा था यह नही पता था कि यह कहाँ का स्थान है ?
आज जब सब कुछ वैसा ही देखा तब लगा कि सपना सच हुआ आगे बढ़ते हुए जब मंदिर में पहुचे तो सारी थकान खत्म अंदर बहुत ही सुकून मिला , आज तक जो भी मूर्तियां देखा हु हनुमान जी की यह मूर्ति सबसे अलग है , पंडित जी ने बताया कि, हनुमान जी जब संजीवनी लेने जा रहे थे तब वहां की बूटियों को देख यहां उतरे थे उनका वेग इतना था कि आधा पर्वत जमीन में धंस गया  यहां एक यक्ष तपस्या कर रहे थे उन्होंने आगे का मार्ग बताया और निवेदन किया कि आप वापस जरूर आएं किन्तु आगे कालनेमि  राक्षस के प्रपंच के विलम्ब होने से वे दूसरे कम् दूरी के रास्ते से वापस गए ,किन्तु वे अपना वादा नही भूले बाद में वापस यक्ष ऋषि से मिलने आये । वहां तब मूर्ती स्वयं प्रगट हुई , हम मंदिर में काफी देर रुके वहां सामने ही बाबा बालकनाथ की समाधि मंदिर है , पूरे हिमाचल में वहां के लोग बाबा बालकनाथ को बहुत मानते है वे बहुत सिद्ध योगी थे । खैर उन्ही सुंदर रास्तो से पुनः वापस आये अपना बैग उठाया और स्टेशन की ओर चले यहां से छोटी लाइन की ट्रेन कालका तक चलती है , हमारी किस्मत की हम रात को सफर कर रहे है वरना यह सफर दिन में करने का है तब वहां के अद्वतीय नजारों को देख सकेंगे , यह मार्ग रेलवे का सबसे अधिक सुरंगों वाले मार्ग में शामिल है , हां हमने शिमला में माल रोड में भी समय गुजारा , ओर महा नगर पालिका भी देखी , ओर पूरे शिमला के एक छोर से दूसरे छोर तक पैदल ही नापे । अब  हम ट्रेन से कालका पहुचे रात करीब डेढ़ बजे  फिर यहां  से बड़ी लाइन ट्रेन पकड़े फिर  दिल्ली सीट बहुत आसानी से मिली किन्तु भीड़ बिल्कुल न के बराबर होने से ठंड बहुत जम के लग रही है यहां तक कि दांत बजने लगे हमारे जैसे तैसे सुबह 6 बजे दिल्ली पहुच गए ,अब बस यही तक ।
आगे का वृत्तांत अगले अंक में

बहुत सी फोटो अब पता नही कहां है जितनी है बस यही हैं।

शिमला महानगर निगम 

शिमला


रिज मैदान 
दलाई लामा मठ

माल रोड शिमला
मैक्लॉड गंज 

चाय के बागान मरांडा 

ज्वाला जी मे धर्मशाला

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