मेरी अधूरी अमरनाथ यात्रा
मेरी अधूरी अमरनाथ यात्रा पार्ट - 1
बात है 19 96 की में उस समय बजरंग दल का जिला संयोजक हुआ करता था एक दिन प्रदेश से पत्र आया कि आतंकवादियों द्वारा अमरनाथ यात्रा पर न आने की धमकी दी गई है तब हमारे तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया जी द्वारा घोषणा की गई कि हम आ रहे है 1 लाख एक भी यात्री को खरोच भी लगाकर दिखाओ इस उद्देश्य से अगर जाना चाहते है तो जानकारी भेजें , सिवनी से कोई तैयार नही हुआ तब में ,ओर मुरारी सोनी जी एवं शंकर कश्यप ने जाने की सहमति भेज दी , हमे जबलपुर बुलाया गया हम 18 अगस्त को सुबह 7 बजे बस से निकले लगभग 11 बजे जबलपुर पहुचे वहां नाम आदी नोट हुआ , दोपहर 3 बजे ट्रेन से निजामुद्दीन के लिए रवाना हुए , भीड़ अत्याधिक थी जिसे जहां जगह मिली वो वहां ठस गया हम भी ऊपर सीट पर बैठ गए बामुश्किल से बैठने लायक जगह मिल सकी मेरे पैर में क्रेक भी था अमरनाथ जाने के चक्कर मे प्लास्टर नही बंधवाया देसी इलाज करते रहा तो सूजन तो नही बस हल्का दर्द था , जैसे तैसे 9-30 को निजामुद्दीन पहुचे फ्रेस होकर कुछ खाने की व्यवस्था की फिर दिल्ली स्टेशन से जम्मू के लिए मालवा एक्सप्रेस से निकले 19 तारीख को तब सुबह 20 तारीख को 04 बजे जम्मू स्टेशन पहुच गए जम्मू की कल्पना हमारे हृदय में अलग थी वहां नजारा बिल्कुल ही अलग था हमने सोचा था बड़े बड़े पहाड़ बर्फ से ढके होंगे वैसा कुछ नही खैर मन को मनाया की भाई ये स्टेशन है आगे मिलेगा , स्टेशन घूम कर नीचे बाजार देखा नास्ता पानी करके करीब 10 बजे संगठन के लोगो द्वारा हमे एक स्थान नाम डायरी में नही लिखा है और मुझे याद भी नही ले जाया ओर रुकवाया गया वहां ओर भी लोग रुके हुए थे लगभग सारे बजरंग दल से सम्बंधित लोग ही थे 02 बजे भोजन की व्यवस्था हुई तीर्थ यात्री संगठन हरिद्वार की ओर से भोजन प्रशादी पाकर मन तृप्त हो गया फिर आराम शाम को थोड़ा घूम घाम के आये तब सुबह की तैयारी चल रही थी , रात्री विश्राम कर सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान कर सुबह 4 बजे दिनांक 21 को पहलगाम की ओर निकले टिकिट के पैसे बस में ही दिए ज्यादा आरामदायक सीट तो नही थी फिर भी काम चल गया , मन मे खुशी उमंग पहली बार कश्मीर देखने को मिल रहा था रास्ते मे लंगर थे शाम 4 बजे बनिहाल पहुँचगये मगर गाड़िया वही रोक दी गईं 4 बजे के बाद यात्रियों को सफर नही करने दिया जाता सो वही रुके रास्ते भर जाम लगते मिले भूस्खलन के कारण , चांदनी रात थी सभी मैदान में कुछ बस में सो रहे थे कि हल्की बूंदाबांदी प्रारम्भ हो गई रात्री 2 बजे से हम बस में जाकर सो गए , सुबह जल्दी निकलेंगे , वाकई सुबह 4 बजे बसें निकल पड़ी , आज 23 तारीख को शाम 04 बजे पहलगाम तो पहुच गए किन्तु जवाहर सुरंग में बहुत बड़ी घटना हो गई सुबह से हल्की बारिश के कारण नजारे बहुत ही सुंदर हो चले थे वादियों में हरियाली ओर आसमान जमी को छूता दिखाई दे रहा था जैसे ही जवाहर सुरंग में गाड़ी दाखिल हुए कुछ डेड किलोमीटर चली होगी कि आगे चल रही किसी बस में कोई खराबी आ गई सारी बसे रुकी जरूर किन्तु बन्द नही की गईं , अब धीरे धीरे समय बीतता रहा बसों का धुआं बढ़ते जा रहा था , धीरे धीरे दम घुटने जैसा लगने लगा खांसी से सभी का हाल खराब हो चला कुछ लोगो को बेहोशी सी आने लगी कंडक्टर से पूछा तो बोला सामने बस खराब हुआ है , बस बन्द नही कर सकते अगर चालू होने में कोई समस्या हुई तो खरता वे बढ़ जाएगा धुंआ सहन नही हो रहा था , मेने मुरारी भैया ओर शंकर को बोला कि में ऐसे तो नही मरूंगा में पीछे भागूंगा कोशिश करते हुए मर जाऊंगा पर ऐसे नही लोग बेहोश होने लगे थे , बेग बांध कर मेने गेट खोला तो बहुत सारा काला धुंआ अंदर घुस गया और ज्यादा लोग परेशान हो गए बाहर कुछ दिख नही रहा था सब काला काला , कंडक्टर ने डांटा बोला भाई सब मरेंगे आप भी ज्यादा नही भाग पाओगे बस भगवान को याद करो , सब जैसी हालत में थे वैसे ही बेठ गए , मेने अंधेरे में ही डायरी खोला और उसमें अपना पता ओर पापा के दोस्त कमल चाचा जी के घर का फोन नम्बर लिखा , ओर यह भी लिखा कि में आज जवाहर सुरंग में फंस गया हूं अगर मर जाऊं तो मुझे इस पते पर पहुचा दें , ओर में भी चुप बेठ गया , बस भगवान से यही मांगा की ऐसी कौन सी गलती हुई है जो इस तरह की मौत मर रहे है , आप ही कृपा करें , आप आश्चर्य करेंगे कि हजारों यात्रियों की भावना और अच्छे कर्म की कुछ ही समय बाद बस चल पड़ी , बस चलने की आवाज कितनी मधुर भी हो सकती है ये उस समय समझ आया , जब बस टनल से बाहर आई तो देखा मुह मद काला काला धुंआ जमा हुआ था , जवाहर सुरंग भारत की सबसे बड़ी सुरंग है लगभग ढाई किलोमीटर से अधिक है , अब वह पहली नही है अब कुल्लू से मंडी के बीच मे बनी सुरंग उस से बड़ी बन चुकी है लगभग 7 किलो मीटर ,
खैर हम शाम 4 बजे पहलगाम पहुच गए मौसम बहुत खराब हो गया था पानी ही पानी सब तरफ , हम ने एक टेंट की शरण ली भूख लगी थी , वहां बहुत सारे भंडारे चल रहे है अभी चाय नास्ता दिया जा रहा था चाय नास्ता करके आगे का कैसा है पता किया तो हमारे जत्थे का टाइम कल का है सुबह जल्दी निकलना पड़ेगा , वैसे चंदनवाड़ी तक बस टेक्सी जा रही हैं , हमने भी सोचा कि वह तक टेक्सी से चले जायेंगे फिर वहां से पैदल जाएंगे , में घूमते हुए सम्भवतः गेट के आगे चला गया आर्मी वाले ने बोला कि आपका जत्था क्कल है अभी आगे न जाएं , हम दूसरे टेंट में चले गए क्योंकि जिसमे थे वहां बैठने तक कि व्यवस्था नही थी यह टेंट बड़ा है पानी नही आ रहा अंदर किन्तु कीचड़ बहुत हो गया है हमने बड़ी पन्नी लाये उसे नीचे बिछाया फिर उसपर दरी उसके ऊपर कम्बल ऐसा बैठे फिर वहां कुछ बाबा लोग भी बैठे थे , मेने एक दो फोटो लिया उनके साथ , कैमरे के सेल बार बार डाउन हो रहे थे और एक बाबा बहुत ही बदतमीज भी था उस से मेरी जोर की बहस हो गई हम लोग वहां से निकल गए एक दो जगह कमरा देखने गए पर नही मिला बहुत मंहगा बता रहे थे पानी बन्द होने का नाम नही ले रहा था आगे एक काका जी ने सोने की जघ बताई पर 100 रुपये व्यक्ति के हिसाब से ,ये बहुत मंहगा था कुछ लोग वापस जाने लगे हैं । हम असमंजस में फंसे है कि क्या करें , मुरारी भैया ने बोले कि उनको किसी ने बताया कि यात्रा बन्द कर दी गई है और अब नही होगी चालू जब तक पानी बन्द न हो जाये स्थिति बहुत खराब हो गई है ऊपर , जब हमने आर्मी वालो से जाकर पूछ लिया जब जाकर फाइनल यह हुआ कि वापस चलते है , हमने बस वाले से बात की रेट ज्यादा बता रहा था फिर भी सेट कर हमने 3 सीट बुक की ओर बेठ गए ,अब जो बुरा होना था वो अब हुआ बस कुछ मीटर दूर ही चली थी कि रोक दी गई , पता लगाया क्या हुआ तो दिमाग घूम गया जवाब सुनकर , पता लगा कि आगे रास्ता खाई में गिर गया है अभी कोई कंडीशन नही की रास्ता खुलेगा ओर कब तक ? है शम्भू क्या परीक्षा है मन खराब होने लगा पर क्या कर सकते है , पर किस्मत से हमने बस की टिकिट कटा चुके थे तो रुकने के लिए बैठने के लिए एक आसरा तो हो गया था क्योंकि जिन टेंटों में लोग लेटे सहुए थे अब वे भी बेठ कर काम चला रहे थे और पानी के कारण कीचड़ ही कीचड़ सब तरफ , बस जहां रुकी थी वहां सामने ही भंडारा था उतर कर भोजन किया फिर बस में बेठ गए ,
आज हां आज दोपहर में केंद्रीय मुख्य सचिव आये थे जायजा लेने , लोगो ने उन्हें घेर लिया और बहुत लताड़ा , सुनने में आया कि सदन में अटल जी ने बहुत बहस की है हमारे विषय मे , अफवाहें बहुत उड़ती है , आज यह भी अपवाह उड़ी की देवगौड़ा सरकार गिर गई है और अटल जी प्रधान मंत्री बन गए लोग बहुत खुश हो जाते है । यू ही बस में बैठे बैठे वही सो गए
आगे का यात्रा वर्णन अगले अंक में .......
हरियाणवी बाबाओं के ग्रुप बहुत मधुर संगीत है इनका
पहलगाम का प्रथम दिन इसके बाद बस में बेठ गए
पहलगाम जाने के पहले रास्ते मे
केंद्र से जायजा लेने मुख्य सचिव का आगमन ओर लोगो का गुस्सा
अब जो भी है जो आये थे , ये ही है
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